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Friday, April 15, 2011

A FEW LINES (कुछ पंक्तियाँ )

I walk every step stealthily
Lest I tread on my dreams

दबे दबे से कदम
ख्वाबों पर कहीं पैर पढ़ जाए !

Sunday, March 27, 2011

ज़िन्दगी टुकड़ों में

ज़िन्दगी टुकड़ों में बट रही है
अनगिनत चेहरे है मासूमियत के
कौनसा चुन लूँ कौनसा तोड़ दूँ
निर्णय ले नहीं पाती हूँ
आप हाथ पकड़ कर दिशा दिखा दो के
राहों से कदम जुड़ गए हैं ऐसे के
मंजिल पे ठहर नहीं पाती हूँ

Saturday, March 26, 2011

THE BEGINNING ( एक शुरुआत )

In the folds of dawn
I am just a moment
New born.......

ऊषा की लालिमा
नभ को चूमती हुई
और मैं इक लम्हा
गहरी नींद से जगती हुई

Friday, March 18, 2011

इक नदी है

इक नदी है पर्बतों के किनारियों से उछलती हुई , पथरीली राहों पर डगमगाकर चलती हुई , फिर एक मोड़ पर सहम कर रुकी रुकी सी बहती हुई, अपनी चंचलता से ऊब गयी हो मानोफिर बंजर, बाँझ सी , अपने बोझ से दबी थम, थम कर पैर रखने वाली समुन्दर से जा मिलतीठीक अपनी ज़िन्दगी जैसीहै ना ?

Thursday, March 10, 2011

A QUIET THOUGHT

Where could have been dreams there is loneliness, a yearning to return to the fetal pose. Where love might have found a repose, there is the torment and tussle of ego. Where prayers should heal there is vanity and the wickedness of a wandering mind. The result, life in a labyrinthine swirl takes me to various shores, leaves me there to lose myself and has a coquettish laugh when I ask my way back home.

जहां ख्वाबों को तैरना था वहाँ अकेलापन है इक बाँझ कोक जैसीजहां मुहब्बत को चैन था वहाँ मैं ने जंग छेड़ दीजहां नमाज़ों में दिल को करार आना था वहाँ बदहवासी ने खूब तबाही मचाईऔर अब ये आलम है की ज़िन्दगी की पेचीदगियां मुझे कहाँ कहाँ ले जाती है और किनारों की तलाश में राह भूल जाती हूँघर का पता पूंछती हूँ तो वह अल्हड नटखट सी होंठ दबाए हंसती हैमैं ज़िन्दगी को तरस जाती हूँ और ज़िन्दगी मुझसे सहम जाती है